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Aacharya Shree Vijay RishabhChandraSuriji Marasaheb

 

ज्योतिष सम्राट प.पू. आचार्य श्री विजय ऋषभचंद्रसूरीजी म.सा.

 

श्री मोहनखेड़ा तीर्थ मे नेत्र , विकलाँगता , नशा मुक्ति , कटे हुए (कुरूप) होठो , कुष्ठ ,मंदबुद्धि आदि चिकित्सा के शिविरो का आयोजन आपके निर्देशन एवं निश्रा मे पूर्ण किए गये | श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास के लिए पूज्य गुरुवर आचार्य प्रवर श्रीमद् विजय विद्याचंद्रसूरीश्वरजी म. सा. के जो सपने , मुख्यत : हास्पिटल , गौशाला , गुरुकुल आदि के थे , वे गुरुक्रपा से पूर्ण कर सच्चे गुरु के सच्चे शिष्य बनने का गौरव हासिल किया | साथ ही गुरु की दिव्यक्रपा तथा राष्ट्रसंत शिरोमणि आचार्य देव श्रीमद् विजय हेमेन्द्रसूरीश्वर जी म. सा. के आशीर्वाद से श्री मोहनखेड़ा तीर्थ को विकास पथ पर आगे बढ़ाया जिसमे मुख्य –


१. राजगढ़ मोहनखेड़ा नाके पर श्री शत्रुन्जय तीर्थ अनुरूप जय तलेटी निर्माण की प्रेरणा |

२. श्री महावीर पवित्र सरोवर (तालाब) जिसकी लागत ५ करोड़ से ज़्यादा है और अ. भा. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के करकमलो से मुहर्त्त हुआ , आपकी प्रेरणा/ प्रयास से निर्मित हुआ |

३. श्री दादागुरुदेव राजेंद्रसूरीश्वर जी म. सा. के शताब्दि महोत्सव के मद्देनज़र मुख्य मंदिर को स्वर्णमय बनाने की परीकल्पना तथा प्रेरणा , शताब्दि महोत्सव के लिए विशाल इतिहास की पुन: रचना करने वाला ,अलोकिक अनुपम सोन्दर्य से युक्त, भव्य कलाक्रति से मंडित जैन संस्क्रति पार्क की रचना मे आपका योगदान है |

४. आप तीर्थ विकास एवं तीर्थ रक्षा के सूत्रधार के रूप मे अपना सहयोग प्रदान कर रहे है |

५. वर्तमान मे अपने गुरु-वर श्रीमद विजयविद्याचंद्र सूरीश्वर जी म. सा. की पुण्य स्म्रति मे आपने गुजरात मे सरोड मे श्री राजेंद्रविद्याधाम तीर्थ की स्थापना की |


मुनिश्री ऋषभचंद्रविजयजी बने गच्छ के आठवें आचार्य

प.पु. आचार्य श्री ऋषभचंद्रसुरिश्वर्जी म.सा.

गच्छ के नायक बनते ही सरकार ने बनाया “बापजी” को राजकीय अतिथि

राजगढ़ : जैन समाज ने ७ मई २०१७ को दादा गुरुदेव राजेन्द्रसुरीश्वर्जी की पात परंपरा के तहत ऋषभचंद्र विजयजी को गच्छ का आठवां नायक स्वीकार किया|मोहनखेड़ा तीर्थ पर बनाई गई भरतपुर नगरी में हुए पट्टाभिषेक समारोह में उन्होंने आचार्य पदवी ग्रहण| यह अब अष्ठम पट्टधर आचार्य श्री ऋषभचंद्रसूरीश्वर्जी कहलाएंगे| समारोह में आयें प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने आचार्यजी  को राजकीय अतिविबोधित किया साथ ही वर्षों  से जीवदया के लिए काम कर रहे आचार्य श्री के निवेदन पर मध्य प्रदेश में सभी अवैध बुछडखाने बंद कराने की घोषणा कर दी|

मोहनखेड़ा तीर्थ पर रविवार को देशभर से आये गुरुभाक्तों , सभी धर्मों के संघों और बड़ी हस्तियाँ की मौजूदगी में ऋषभचंद्रविजयजी ने आचार्य पद ग्रहण किया| समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने भाषण में कहा – इस कार्यक्रम का देखने का मौका मिला , हम सब धन्य हो गए . यह दिन मेरी ज़िन्दगी के सबसे यादगार पलों में से एक है |मोहनखेड़ा में बरसों से जियो और जीने दो का सन्देश दिया जा रहा है| शिक्षा एवं संस्कार यहाँ दिए जाते है| यहाँ आते ही पवित्र विचार मन में आने लगते है| यह तीर्थ अद्भुत है, यह मानवसेवा का अखंड व्रत चलता रहता है| जो महान कार्य यहाँ किये जा रहे है, उसके लिए मैं गुरुदेव के चरणों में प्रणाम करता हूँ और भरोसा दिलाता हूँ की कोई भी अवैध कतलखाने को धरती पर नहीं रहने देंगे| जियो और जीने दो के मूलमंत्र का आत्मज्ञान करेंगे| उन्होंने आगे कहा – गुरुदेव को हम राजकीय अतिथि घोषित करते है और प्रार्थना करते है की प्रदेश की ७ करोड़ जनता को इस मौके पर आप आशीर्वाद प्रदान करे| मैं उनकी और से आपका अभिनंदन करता हूँ|

मुख्यमंत्री को आराधना के लिए भेट की माला :

मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समारोह के दौरान आशीर्वाद माँगा था| इस पार आचार्यश्री में विशिष्ट रूप से अमिमंत्रित चांदी की माला मुख्यमंत्री को भेट की एवं आग्रह किया की वे इनका निम्नलिखित रूप से जाप करे |इससे प्रदेश का विकास होगा व लम्बे समय तक प्रदेश की सेवा करते रहेगे|आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में मंगल कामना व्यक्त की कि जिस प्रकार आपने शादी की २५ वि वर्षगाँठ प्रदेश की सेवा करते हुए मनाई, इसी प्रकार शादी की ५०वि वर्षगाँठ भी प्रदेश की सेवा करते हुए मनाए |

ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी रहे मौजूद :

सुरिमंत्र की सभी क्रियाएं मुनिश्री हितेनचंद्रविजयजी ने संपन्न करवाई | अंत में पाट परंपरा एवं नवीन आचार्य नाम की घोषणा विधि मुनियों ने संपन्न करवाई| श्री आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेताम्बर पेढ़ी ट्रस्ट के उपाध्यक्ष श्री पृथ्वीराज कोठारी , महामंत्री फतेहलाल कोठारी, कोषाध्यक्ष हुक्मीचंद वागरेचा , मैनेजिंग ट्रस्टी सुजागमल सेठ अवं बाकी सभी ट्रस्टी समारोह में मौजूद थे|

आचार्यश्री को वासक्षेप डालने के लिए मुनि भगवंतों की भीड़ :

जैसे ही ऋषभविजयजी आचार्य पाट पर बैठे तो उन पर वासक्षेप डालने की होड़ मच गई| सर्वप्रथम युवाचार्य विश्वरत्नसागरसुरिश्वर्जी में नवीन आचार्य पर वासक्षेप डाला| इसके बाद मुनि श्री हितेश्चंद्रविजयजी म.सा. एवं मुनियों ने आचार्यश्री को वासक्षेप किया| इसके बाद साध्वी मंडल ने भी आचार्यश्री को वासक्षेप डालकर उनके मंगल जीवन की कामना की|

इनकी रही निश्रा :

मुनिराज श्री हितेशचंद्रविजयजी म.सा. , मुनिराज श्री पीयूषचंद्रविजयजी म.सा. , मुनिराज श्री दिव्यचंद्रविजयजी म.सा. , मुनिराज श्री रजतचंद्रविजयजी म.सा. , श्री चंद्रयश विजयजी म.सा. , श्री प्रीतीयशविजयजी म.सा. , श्री वैराग्ययशविजयजी म.सा. , श्री जिनचंद्रविजयजी म.सा. , श्री जीतचंद्रविजयजी म.सा. , श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा. , श्री सपेंद्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री किरणप्रभाश्रीजी म.सा. , श्री सदगुना श्रीजी म.सा. ,साध्वीजी श्री संघवनश्रीजी म.सा. , साध्वीजी श्री वसंतमालाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में श्री आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेताम्बर पेढ़ी ट्रस्ट के तत्वधान में यह आयोजन हुआ|

 

 

 

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