Feedback Us !

Checking...

Ouch! There was a server error.
Retry »

Sending message...

Review It !

0 100

Advertisement

slide
slide
slide
slide
slide

आचार्य श्री शय्यंभवसूरीजी म.सा.

 

आचार्य श्री शय्यंभवसूरीजी म.सा.

 

श्री प्रभवस्वामीजी ने स्वयं की पात के योग्य पट्टधर के लिए जिनशासन में नजर घुमाई लेकिन योग्य पट्टधर नहीं देखने पर प्रदशन में से शय्यंभव भट्ट को योग्य जानकार प्रतिबोध देकर जैन दीक्षा दी| यह शय्यंभवसूरी मगध की प्राचीन राजधानी राजगृही नगरी के वत्सगोत्रीय क्रियाचुस्त ब्रह्माण थे| वे गृहस्थ जीवन में ही विद्धान थे| प्रभवस्वामी ने जब ज्ञान का उपयोग दिया तब उन्हें शय्यंभव भट्ट ही संघ की धुरा को संभालने में दक्ष दिखे|

तब उन्होंने दो उपदेश कुशल साधुओं को यज्ञ करते हुए शय्यंभव के पास भेजे और उन साधुओं ने उस ब्रह्माण से कहा इतना कष्ट सहन करने के बाद भी आप तत्व नहीं जानते, तब शय्यंभव ब्रह्माण सत्य तत्व कौन-सा है? यह पूछने पर उन्होंने यज्ञ स्तंभ के नीचे रह्की हुई शांतिनाथ प्रतिमा को बाहर निकलवाकर कहा की यही तत्व है| फिर उन्होंने प्रतिबोधित होकर दीक्षा ली उस समय उनकी पत्नी गर्भ वती थी| उसने पुत्र को जन्म दिया व उसका नाम मनक रखा|

मनक माता के कहने से अपने पिता को ढूंढने निकला व उनके पास दीक्षा ली| शय्यंभवसूरीजी ने उसका आयुष्य छ: महीने का जानकर उसके लिए दशवैकालिक सूत्र की रचना की| मनक मुनि भी उसके अनुसार आराधना करके देवलोक गए| फिर शय्यंभवसूरीजी भी यशोभद्रसूरीजी को अपने पाट पर स्थापित करके स्वर्ग में गए| उन्होंने २८ वर्ष गृहस्थ जीवन में व ३४ वर्ष का दीक्षा पर्याय पूर्ण कर, कुल ६२ वर्ष का आयुष्य पूर्ण किया|

Vyaktitv(Chief Patron)
slide
slide
slide
slide
slide
Shraddhanjali
slide
slide
slide
slide
slide
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
slide
slide
slide
slide
slide
News
slide
slide
slide
slide
slide
slide
Suvichar
slide
slide
slide
slide
slide
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
slide
slide
slide
slide
slide
. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
slide
slide
slide
slide
slide
slide
slide
Advertisement

slide
slide
slide
slide
slide