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Jawai Bandh

जवाई बांध(एरणपुरा)

राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर स्थित सुमेरपुर मंडी से ९ की.मी. दूर, बीजापुर जाने वाली सड़क पर एक प्राचीन नगर बसा है “एरणपुरा”, जिसकी वर्तमान में पहचान है “जवाई बांध”|

ई.सन १८८५ के लगभग पश्चिम रेलवे की दिल्ली अहमदाबाद रेलवे लाइन मार्ग का निर्माण हुआ और पास की सुमेरपुर मंडी से यह महत्वपूर्ण स्टेशन बना एरणपुरा|कालांतर में पाली जिले के सबसे महत्त्वपूर्ण व विशाल बांध का जवाई नदी पर निर्माण हाउर नाम पड़ा जवाई बांध|धीरे-धीरे स्टेशन का नाम भी बदल गया और नया नाम प्रसिद्ध हुआ”जवाई बांध स्टेशन”|

समय के साथ व्यापार हेतु यहाँ जैन परिवार आकर बसने लगे|वर्तमान में कुल ९ जैन परिवार और ६० जैन जनसंख्या तथा २ जैन मंदिर है|नाणा निवासी शा. स्व. अनोपचंदजी प्रेमचंदजी राठोड परिवार ने परमात्मा भक्ति हेतु जिनमंदिर के निर्माण की भावना लेकर आपसी तालमेल बिठाया| श्री मगनीरामजी भूताजी सोलंकी परिवार ने जमीन प्रदान की एवं आराधना भवन के बाहर का भाग निर्माण करवाया| गुरु से प्रेरणा और आशीर्वाद पाकर राठोड परिवार ने मंदिर का निर्माण प्रारंभ करवाया तथा कालांतर में मुलनायक प्रतिमा लेख अनुसार , वीर नि.सं. २४९९, शाके १८९४ व वि.सं. २०२९ द्वि. वैशाख वदी ६, मई १९७३ को गोडवाड़ रत्न पू.आ. श्री जिनेन्द्रसूरीजी के वराद हस्ते घुमटबंध जिनप्रसाद में मुलनायक श्री १२वे तीर्थंकर नमिनाथ प्रभु की श्वेतवर्णी, १७इंची,पद्मासनस्थ, सुन्दर प्रतिमा सह त्रिगडा प्रतिष्टित करवाया| प्रतिवर्ष ध्वजा मगसर सुदी १० को मंदिर निर्माता परिवार के श्री घिसुलालजी अनोपचंदजी राठोड, नाणा निवासी ध्वजा चढाते है|

श्री मुनिसुव्रत स्वामी : खिवांदी निवासी, जो वर्तमान में यहाँ आकर अबसे है, रामिणा गोत्रीय स्व. सांकलचन्दजी, पत्नी चुन्नीबाई पुत्र करमचंद ने स्टेशन के दूसरी तरफ जवाई बांध की तरफ जाने वाली सड़क के पास अपने निजी बंगले के बाहर गुंबबद्ध छोटे से गृह जिनमंदिर में वीर नि.सं. २५३१, शाके १९२६ , वि.सं. २०६१ के माघ वदी ५ को मंण्डवारिया (जवाल) के प्रतिष्ठोतसव पर पू. आ. श्री अरविंदसूरीजी के हस्ते अंजनशलाका प्रतिष्ठा करवाकर, वि.सं. २-६१ के माघ शु. ५(वसंत पंचमी), रविवार दी. १३ फ़रवरी २००५ को, मेवाड़ देशोद्वारक पू. आ. श्री हिमाचलसूरीजी शिष्य पंन्यास श्री विधानंद विजयगनी की पावन निश्रा में २०वे तीर्थंकर मुलनायक श्री मुनिसुव्रत स्वामी सह श्री नमिनाथजी,श्री शांतिनाथजी, श्री नाकोडा भैरूजी ,श्री पद्मावती माता प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा संपन्न हुई|चेन्नई में इस परिवार के श्री विमलकुमार करमचंद रामिणा (फर्म: शांति स्वीट भंडार) बसे है, जो अपने जिनालय की साड़ी व्यवस्था संभालते है|

जवाई बांध : पाली जिले की पूर्वी सीमा पर अरावली पहाड़ होने के कारण किसी जमाने में यह क्षेत्र मारवाड़ में नखलीस्तान (हरित क्षेत्र) के नाम से जाना जाता था| यहां घने जंगलों के काटने के बाद वर्षा औसत से कम होने लगी और सुखा पड़ने लगा| आजादी के पूर्व पाली जिले में केवल २ बांध थे| सरदारसमद व सादड़ी, जवाईबांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ, किंतु सिंचाई का लाभ आजादी के बाद ही मिलने लगा|आज तो पाली जिले में छोटे-बड़े १०० बांध तैयार हुए है| जवाई बांध तो जोधपुर और पाली जिले के लिए पीने के पानी का एक मात्र स्तोत्र रह गया है| जवाई बांध की जल क्षमता बढाने के लिए अरावली पहाड़ में २१,९०० मीटर लम्बी सुरंग खोदकर साईं नदी का पानी जवाई नदी में मिलाया गया है|

 

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