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Mandal

 

मांडल

 

शुरवीरों, धर्मविरों एवं दानवीरों से शोभित राजस्थान प्रांत के पाली जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर ढोला चौराहा से रानी जानेवाली सड़क पर, ढोला से ६ की.मी. दूर छोछोडी पहाड़ी के पास व नदी के सुरम्य तट पर नगर बसा है “मांडल” |

अति प्राचीन इस नगर के पास नदी के किनारे, पर श्री मणिनाथजी का प्राचीन मंदिर है| रावले के ठाकुर साहब की धर्मपत्नी को नदी के कारण, उस पार मंदिर जाना कठिन होता था, इसलिए ठाकुर साहब ने रावले में मंदिर बनवाया| इन्हिंथाकुर साहब ने मणिनाथजी का मंदिर बनवाया और मांडल गांव को बसाया|

इसी तरह नदी किनारे श्री बायोसा माता के मंदिर में अलग-अलग शिलालेख खुदे है, जिनमे से एक संवत् १६८८, वैशाख वदी का लेख, थोडा सा पढ़ने में आता है| दुसरे लेख भी इसी संवत् के है| इनसे प्राचीन का पता चलता है|

“जैन तीर्थ सर्वसंग्रह” ग्रन्थ के अनुसार, श्री संघ मांडल ने बाजार में रावले के पास, शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाया एवं वि.सं. सं. १९०० में मुलनायक श्री पार्श्वनाथ प्रभु सह पाषण की ४ व धातु की एक प्रतिमा स्थापित करवाई| ६० वर्ष पूर्व यहां १२० जैन व २ धर्मशालाए थी| प्रतिमा का लेख संवत् १८६३ का होना लिखा है| “मेरी गोडवाड यात्रा” पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पूर्व यहाँ एक जैन मंदिर में मुलनायक श्री पार्श्वनाथ विराजमान थे| दो धर्मशाला और ओसवालो के ३५ घर विधमान थे|

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श्री चिंतामणि पार्श्वनाथजी मंदिर :प्राचीन जिनालय का आमूलचूल पूर्ण जिणोरद्वार चालू है|दो मंजिला आरास पत्थर से निर्मित जिनालय की जल्दी ही प्रतिष्ठा संपन्न होगी| प्राचीन जिनमंदिर में मुलनायक श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ प्रभु की श्वेतवर्णी, पद्मासनस्थ, नवफणों से शोभित अलौकिक प्रतिमा के लेख से सं. वीर नि.सं. २३५२, शाके १७४७, वि.सं. १८८२ के माघ सुदी ५, फ़रवरी १८२६ की,जानकारी प्राप्त होती है| इनकी द्वितीय प्रतिष्ठा वीर नि.सं. २४८७, शाके १८८२, वि.सं. २०१७, द्वि, जेठ सुदी ११ जून १९६१ को, गोडवाड़ रत्न, आ. श्री जिनेन्द्रसूरीजी के वरद हस्ते, संपन्न हुई| तपगच्छ अधिष्ठायक श्री मणिभद्रवीर की प्रतिमा स्थापना लेख से ज्ञात होता है| प्रतिमा के दोनों ओर श्री आदेश्वरजी व श्री सुपार्श्वनाथजी की प्रतिमाएं १५वि सदी की ज्ञात होती है|सुपार्श्वनाथ प्रभु के बगल में श्यामवर्णी ४ अंगुल की छोटी सी सुन्दर प्रतिमा स्थापित है| प्रतिवर्ष ध्वजा वैशाख सुदी ६ को चढ़ाई जाती है| यहां के चबूतरे का निर्माण सं. २०४६, महा वादी २, रविवार, दी. २८.१.१९९१ को हुआ है|

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दीक्षा :गाँव से दीक्षित पू. मुनि श्री विभाकरविजयजी, पू. सा श्री चिरागरत्नाश्रीजी, सा. श्री पूण्यरत्नाश्रीजी, सा. श्री तपोरत्नाश्रीजी ने संयम लेकर, कुल गांव मांडल का नाम रोशन किया है|

मांडल : यहाँ जैनों के १०० घर व ६०० के करीब जनसंख्या है| ग्राम पंचायत मांडल की कुल जनसंख्या ४००० के करीब है| १०वि तक स्कूल, सरकारी अस्पताल, ग्रामीण बैंक, दूरसंचार, इत्यादि साड़ी सुविधाएं उपलब्ध है| प्रति वर्ष चैत्र सुदी २ की श्री मणिनाथजी मेले पर हजारों भक्त माता टेकते है| गाँव में अन्य १० हिन्दू मंदिर है|

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