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Shree Sambhavnath jain Temple, Puliyantop (Chennai)

श्री संभवनाथ जैन मंदिर, पुलियानतोप

 

धर्मनगरी चेन्नई का पुलियानतोप क्षेत्र कुछ वर्षों पूर्व आमली गुट्टा के नाम से भी जाना जाता था क्योंकि यहाँ पूर्व में झुण्ड के झुण्ड झमली के गुच्छों वृक्षों पर लटकते थे| तमिल भाषा में इमली को “पुली” कहा जाता है और समूह को “तोप” | अत: इस क्षेत्र का नाम कालान्तर में “पुलियानतोप” पड़ा| राजस्थान की मरुभूमि से आये हमारे पूर्वजों ने सुसंस्कार, मर्यादा और धर्मभावों की विरासत को सदेव बनाये रखा| इस भूमि को उन्होंने अपनी कर्म भूमिके साथ-साथ, अपनी धर्मभूमि भी बनाया और, अर्थोपार्जन के साथ पुण्योपार्जन में भी हमेशा आगे रहे|

राजस्थान मूल के प्रवासीजन लगभग ५५ वर्ष पूर्व यहाँ आवास-निवास, व्यापार आदि के लिए इस क्षेत्र में बसे| तब यहाँ कच्ची सड़के थी और ब्रिटिश सरकार की बननी कपड़े की मिल थी| जिसका कपड़ा अच्छी गुणवता के लिए देशभर में सुप्रसिद्ध था| इस मिल में दूर सुदूर से रोजगार हेतु आकर, लगभग २०,००० व्यक्ति काम करते थे| पुलियानतोप में एक विशाल पॉवर हाउस (जी.एम.आर.) भी है और कहते है ब्रिटिश काल में यहाँ पर कई बारूद के कारखाने व गोदाम थे|

मूल गंभारे में मुलनायकजी सहित तीन प्रतिमाएं विराजित है| मुलनायक प्रतिमा के बायीं ओर तीर्थंकर नाभिनंदन आदेश्वर दादा की श्वेत वर्णीय २५ इंच ऊँची प्रतिमा विराजमान है| मुलनायक परमात्मा के दायीं ओर तीर्थंकर परमात्मा विमलनाथ प्रभु की श्वेत वर्णीय २५ इंच कायायुक्त प्रतिमा विराजमान है| आत्म अनुभूति की उच्च दशा में पहुचें इन प्रभुजी की प्रतिमा अत्यंत लुभावनी है|

मूलगंभारे के बाहर ४५० वर्ग फीट के कलात्मक रंगमंडप की छठा निराली है| कोलाहल से दूर अद्भुत शान्तियुक्त इस रंगमंडप की दायीं ओर के गोखले में श्री त्रिमुख यक्ष की प्रतिमा आसीन है| बायीं ओर के गोखले में श्री दुरितारी देवी की सौम्य प्रतिमा प्रतिष्टित है| इस जिनालय की प्रतिष्ठा वि.सं. २०६६, वैशाख सुदी ६, दिनांक १९.५.२०१०, बुधवार को प.पू. आचार्य श्रीमद विजय जिन्नोतमसूरीश्वरजी म.सा. के वरद हस्ते सुसंपन्न हुई|

प.पू. आचार्य भगवंत श्रीमद्  विजय सुशीलसूरीश्वरजी म.सा. की शुभ निश्रा में उनके संयम जीवन का अंतिम शिलान्यास इस मंदिर का संपन्न हुआ|

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