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Shree Sambhavnath Swami Jain Temple (Mahavir Colony- Chennai)

 

श्री संभवनाथ स्वामी जैन मंदिर (महावीर कॉलोनी)

 

जैनत्व के मूल आधार जैसी , श्रावक जीवन की नींव जैसी, अध्यात्म मार्ग की सोपान श्रेणी जैसी, विघ्नों का विनाश करने वाली, अभ्युदय को साधने वाली, पाप कर्मों को मिटानेवाली, पूण्यकर्मों को बढानें वाली और शाश्वत धाम-परम पद तक पहुंचाने वाली ये त्रिभुवन नायक जिनेश्वर परमात्मा की पूजा किये बिना, आलम्बन लिए बिना जीवनोद्वार संभव नहीं, विकास नहीं, आगे बढ़ने का कोई अवकाश नहीं| इस दिव्य-दैविक भावना को मन में लेकर जिनालय का निर्माण होता है|

वेपेरी ई.वि.के. सम्पत रोड पर श्री संभवनाथ जैन मंदिर के समीपस्थ श्री महावीर कॉलोनी, अपनी अनुपम छठा को संजोय, बरसों पूर्व से सभी संप्रदाय के जैन परिवारों की हृदयस्थली बनी हुई है| इस क्षेत्र को मुंबई के वालकेश्वर नगरी सम उपमा भी दी गई है| कई समृद्धशाली धनाढय धार्मिक परिवार इस कॉलोनी में रहते है| जिन्होनें करीब दो दशक पूर्व अपने परमात्मा को अपनी बस्ती में गादीनशीन करने का भागीरथ प्रयास किया और तब से इन असंभव को संभव करणार दादा ने सभी के जीवन को कायाकल्प कर दिया|

चेन्नई के प्रसिद्द क्षेत्र वेपेरी में स्तिथ महावीर कॉलोनी में मुलनायक तीर्थंकर परमात्मा श्री सम्भवनाथ भगवान विराजमान है| सुन्दर व मनोहर श्वेतवर्णी प्रतिमा के दर्शन में लीं होने से परम शान्ति, परम आनंद, परम प्रसन्नता की अनुभूति होती है| भव भ्रमणों में भटकते जीवों के लिए ये परमात्मा शीतल छाया-सी ठंडक का दिव्यभास कराते है| प्रभुजी को सस्नेह आत्मकालीन होकर निहारने से भक्त को आत्मानंद की अनुभूति होती है| ये प्रचंड तेजपुंज १५ इंच देहप्रमानयुक्त पद्मासनस्थशोभायमान है| गुण रत्नों से परिपूर्ण इन परमात्मा का जिनबिंब अति प्रितिकारक और मनोहारी है|

मुलनायक देवाधिदेव संभवनाथ स्वामी के दायी ओर श्वेतवर्णीय श्री शीतलनाथ परमात्मा तथा बायीं ओर श्री महावीर स्वामी की श्वेतवर्णीय प्रतिमाएं पद्मासनस्थ विराजमान है| प्रभुजी के पीछे कलातमक सौन्दर्ययुक्त पट्ट मूलगम्भारे की शोभा को वृधिगत करता है|

इस जिनालय की प्रतिष्ठा वि.सं. २०४५, कार्तिक वदी ५, दिनांक २८.११.१९८८, सोमवार के शुभ दिन मंगल मुहूर्त में प.पू. आचार्य श्रीमद् विजय पद्मसागरसूरीश्वरजी म.सा. की शुभ निश्रा में सुसंपन्न हुई| चतुर्विध संघ के साथ हर्षोल्लास से प्रतिष्ठा मोहत्सव अपने अनोखे अंदाज में, ठाठ-बाट से मनाया गया| वि.सं. २०१३५, जेठ सुदी १४ को जिन प्रसाद निर्माता परिवार संघवी भुरमलजी (बॉम्बे स्टील हाउस) की पूण्य तिथि के प्रसंग पर इस जिनालय को उनके परिवार वालों ने श्री संघ के दर्शनार्थ, श्री वेपेरी संघ को समर्पित किया|

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