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श्री धनचंद्रसूरीजी म.सा.

 

श्री धनचंद्रसूरीजी चर्चा चक्रवती म.सा.

 

आपका जन्म वि.सं. १८९६ चैत्र सूद ४ को किशननगर में हुआ, आपके पिता का नाम ऋद्धिकरणजी, और आपकी माता का नाम अचलादेवी था| जन्म के साथ आपका नाम धनराज रखा गया| धानेरा के यति लक्ष्मीविजयजी के पास वि.सं. १९१७ वैशाख सूद ३ को दीक्षित हुए| और आपका नाम धन विजयजी रखा गया| प्राथमिक अध्ययन के बाद रत्नविजयजी के पास ज्ञानार्जन हेतु पधारे ज्ञानोपसंदा ग्रहण की, क्रियोद्वर, राजेन्द्रसूरीजी के साथ जावरा में किया|

वि.सं. १९२५ को खाचरौद में उपाध्याय पद और जावरा में वि.सं. १९६५ में आचार्य पद पर शोभित हुए| आपके गुलाबविजयजी, हंसविजयजी आदि ४ शिष्य हुए| वि.सं. १९७७ के भादरवा सूद १ बागरा(राज.) में आपका स्वर्गवास हुआ| यतिपने में संगीतज्ञ थे इससे आपकी रचनाएं अत्यंत लालित्यपूर्ण थी| तर्क शक्ति अधिक थी, इस कारण चर्चा चक्रवती की पदवी से शुशोभित किया गया| ज्योतिष में प्रकांड विद्धान थे| यति धरनेन्द्रसूरी से रत्नविजयजी के अलग होने पर अनेक साथ, धनविजयजी एवं प्रमोदरूचिजी ही साथ चले थे और क्रियोद्वार के समय भी ये दोनों ही साथ थे – सभी संघर्षो में सम्पूर्ण समर्पित रहकर स्तंभ की तरह अडिग रहे|

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