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Shree Pannalalji Ranawat

 

शिक्षा के प्रति समर्पित समाजसेवी

श्रीमान पन्नालालजी राणावत

pannalalji ranawat1

               यदी मानव में परिश्रम और विश्वास के साथ हौसला बुलंद हो, मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति हो तो क्या असंभव है, किसने सोचा था की एक दिन मानव चाँद तक पहूँच जाएगा, पर इसी मानव ने ख्वाब को हकीकत बनाकर बता दिया की जीवन में मेहनत, सूझभुझ और दृढ़ संकल्प हो तो हर सपना साकार हो सकता है, धीरज और निष्ठा व्यक्ति और कर्मठता के बूते कई उतार-चढ़ाव के बावजूद जीवन में संघर्ष कर काम को देवता मान सफलता के लिए निरंतर जूझते-जूझते साधना और समर्पण भाव से तूफ़ान में दिया जलाने वाले ऐ प्रतिभावान गोडवाड़ की धरोहर जैसे पुरुषार्थ वाले कर्मवीर श्री पन्नालालजी राणावत के जीवन की संघर्ष गाथा के कुछ यादगार व् खट्टे मिट्ठे जीवन के कुछ अनुभवों को आपके बीच प्रस्तुत किए जा रहे है|

 

               गोडवाड़ की गौरवशाली दुजाना की धन्यधरा में पिता वक्तावरमलजी व् माता श्रीमती मीराबाई के घर आँगन में खिले फूल श्री पन्नालालजी राणावत ऐसे कूल दीपक साबित हुए की आज अपने कर्म और पुरुषार्थ के बूते न केवल अपने माता-पिता, परिवार बल्कि गाव व समाज के अलावा व्यवसाहिकजगत में अपनी शोहरत का ऐसा झंडा गाड दिया की जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है| ऐसे ही सरल स्वभावी श्री पन्नालालजी राणावत ने धार्मिक कार्य में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है| दुजाना गाव में शान्ति स्नात्र महापूजन व् छोटी प्रतिष्ठा में राणावत की अहम् भूमिका रही है| इतना ही नहीं खेलप्रेमी राणावत ने दुजाना में मातुश्री मीराबाई वक्तावरमलजी क्रीडा संकूल बनाकर गाव को सुपर्द कर अपने परिवार का नाम रोशन किया |

               जैन समाज के अलावा राणावत दूसरी कौम के धार्मिक कार्य में सक्रीय भूमिका निभाई है इन्होने खेडादेवी मंदिर के जिणोरद्वार व् मीणा समाज के माताजी मंदिर के जिणोरव्द्वार में उनका विशेष योगदान देकर अपने गाववासियो के प्रति प्रेम भावना व् समर्पण का भाव प्रकट किया| दुजाना ही नहीं राणावत ने जैतपुरा तीर्थ में अतिथि कार्ट्स योजना में अपना एक बंगला बनाकर तीर्थ को सुपर्द किया | ऐसे कई कार्य राणावत ने अपने व्यवसाही जीवन में किए जिसकी गणना करना मुश्किल है| राणावत ने आदेश्वर धाम में प्याऊ का निर्माण, बिरामी ढाणी में प्याऊ का निर्माण, पाली व गुंदोज की गौशाला में भी राणावत का योगदान रहा है | श्री हंजाबाई गौशाला केंद्र बड़ा द्वारा संचालित पशु चिकित्सा शिविर जब दुजाना गाव में आयोजित हुआ तब इस शिविर के लाभार्थी राणावत परिवार ही थे| शिविर में कई मुख पशुओ का इलाज करवाकर जीव दया प्रेमी के रूप में राणावत को सदियो तक याद किया जाएगा| साथ ही राजस्थान की गोडवाड़ धरा ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की पावन भूमि में भी राणावत ने अपना योगदान जारी रखा| 

               मुंबई में स्थित श्री क्षेत्रपाल भवन में राणावत ने एक कमरा भेट किया ज्ञातव्य रहे श्री पन्नालालजी राणावत क्षेत्रपाल भवन में ट्रस्टी भी है| सन १९८७ में गाव के मुख्य मंदिर दादा विमलनाथ भगवान के मंदिर की ध्वजा का चढ़ावा लेने में राणावत ने अहम किरदार निभाया |इस ध्वजा का श्रीमान चिमनाजी नाथाजी गुलाबजी राणावत परिवार ने लाभ लिया था जिसमे पन्नालालजी का भी सहयोग रहा था| दूजाणा के इस भामाशाह को एक से बढ़कर एक सम्मान मिला है | शिक्षा, जीवदया व् समाज के उत्कष्ट योगदान के लिए राणावत का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा |

 

               जब शिक्षा के योगदान की बात करते है तो राणावत ने दिल खोलकर एक से एक मनोहरनीय विधालय का निर्माण करवाकर दुजाना ही नहीं पुरे गोडवाड़ को गौरवान्तित किया| श्री राणावत ने दुजाना में दो अत्याधुनिक विधालय को निर्माण करवाया है जिसमे एक श्रीमती सुमित्रा देवी पन्नालालजी उच्च माध्यमिक विधालय, दुजाना दूसरी श्रीमती सुमित्रा देवी पन्नालालजी उच्च प्राथमिक विधालय, दुजाना का निर्माण कार्य करवाया है| इस प्राथमिक विधालय का उद्घाटन १ मई २०१४ को दुजाना गाव में किया गया था| इसके तत्पश्चात यह विधालय दुजाना गाव को सुपर्द की जाएगी| पन्नालालजी की ऐसी मंशा थी की दुजाना गाव में शिक्षा से कोई वंचित न रहे इसके लिए तन-मन और धन से संपूर्ण सहयोग देकर शिक्षा के प्रति समर्पित होकर अपनी आस्था का परिचय दिया|

 

               पन्नालालजी पिछले दो वर्षो से लगातार गोडवाड़ की गौरवमई शिक्षण संस्था विधावादिमे मुख्य अतिथि के रूप में शोभायमान रह चुके है| राणावत ने विधावाडी जैसी संस्था में स्टाफ रूप में आवासीय भवन बनाने हेतु फण्ड उपलब्ध करवाया था| उनकी इस उपलब्धियो के कारण श्री राणावत को मुंबई में आयोजित उडान समारोह में विशेष सम्मानित किया गया | राणावत ने भी  अपने दिल की तिजोरी को खोलकर उड़ान समारोह में मेडिकल कैंप अपंग व् पोलियो ग्रस्तो को सहज उपलब्ध करवाया दुसरे के प्रति प्रेम भावना का संदेश दिया|

 

               वर्तमान में वृद्धा अवस्था होने के बावजूद भी राणावत का मन एक चेतन विकासमान है| आज भी इनके नेतृत्व में केनपुरा में अस्थाई मंदिर व प्याऊ का कार्य जोरो पर चल रहा है|

 

               राणावत की गोडवाड़ के प्रति प्रेम भावना और अटूट लग्न ने राजस्थान सरकार द्वारा माननिय मुख्यमंत्री श्री वसुंधरा राजे सीन्धिया के मुख्यमंत्री कार्यकाल में श्री पन्नालालजी वक्तावरमलजी राणावत, रमेश कुमार पन्नालालजी राणावत , अरविंद कुमार पन्नालालजी राणावत एवं प्रफुल कुमार पन्नालालजी राणावत को भामाशाह पदवी से अलंकृत किया था| आज भी राणावत को गोडवाड़ में एक अनमोल रत्न की उपाधि से देखा जा रहा है| राणावत का अपना जवेरी बाजार में स्वर्णशिल्प चेन्स प्रा.लि. नाम में प्रतिष्ठान स्थित है जो वर्तमान में उनके नेतृत्व में तीनो पुत्र संभाल रहे है| राणावत के तीनो पुत्र रमेश कुमार, अरविंदकुमार एवं प्रफुलकुमार भी मिलनसार व्यक्तित्व के प्रतिभाशाली  आज्ञाकारी पुत्र है| पन्नालालजी के मार्गदर्शन  में वे अपने जौहरी व्यवसाय को सफलता के शिखर पर ले जाने को प्रयासरत है|

 

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