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श्री संभवनाथ भगवान

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3. Shree Sambhavnath Bhagwan

 

सम्भवनाथजी : तृतीय तीर्थंकर सम्भवनाथजी की माता का नाम सुसेना और पिता का नाम जितारी है।

सम्भवनाथजी का जन्म मार्गशीर्ष की चतुर्दशी को श्रावस्ती में हुआ था।

मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन आपने दीक्षा ग्रहण की तथा कठोर तपस्या के बाद कार्तिक कृष्ण की पंचमी को आपको कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।

चैत्र शुक्ल पक्ष की पंचमी को सम्मेद शिखर पर आपको निर्वाण प्राप्त हुआ।

जैन धर्मावलंबियों अनुसार उनका प्रतीक चिह्न- अश्व, चैत्यवृक्ष- शाल,यक्ष- त्रिमुख, यक्षिणी- प्रज्ञप्ति।


प्रभु के नाम करण में गर्भित रहस्य 

संभवनाथ भगवान : प्रभु के गर्भ में आने के पूर्व दुष्काल की स्थिति थी…. परन्तु प्रभु के गर्भ में आते ही धन्य की उत्पत्ति होने से प्रभु का नाम “संभव” रखा गया|

 

Father’s Name ———————- Jitari
Mother’s Name ——————— Susena
Birth Place ————————— Sharavasti
Birth Thithi ————————- Margshirsh su  14
Diksha Thithi ———————–Margshirsh su  15
Kevalgyan Thithi —————— Kartik ku 5
Naksharta —————————- Margshirsh
Diksha Sathi ————————  1,000
Shadhak Jeevan ——————-  1,00,000 purva
Age Lived —————————- 60,00,000 purva
Lakshan Sign ———————–  Horse
Neervan Place ———————   Sammed Sheekharji
Neervan Sathi ———————-  1,000
Neervan Thithi ——————–  Chaitra su. 5
Colour  ——————————-   Golden


***** जिन दर्शन स्तुति (Jin Darshan Stuti)*****

संसारसंतारण-सिद्धिसिट्ठो,

सिद्धेसरो संभववणाह ! दीट्टो |

सारं सग्गमं सुहसारसिखा,

सो साहई आम्ह समिसदिक्खा |

इसका अर्थ है : हे संभवनाथ ! संसार से सम्यग् तारक शेष्ठ सिद्धि को पाए हुए, सिद्धेश्वर (आत्मिक ऐश्वर्य की सिद्धि है) आपने समग्र सार को देखा है| ऐसे संभवनाथ प्रभु ने शुभ और सारभूत सिक्षा जिसमें है ऐसी दीक्षा हमको कही है |

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