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श्री तिर्थेन्द्रसूरीजी म.सा.

 

श्री तिर्थेन्द्रसूरीजी म.सा.

 

आपका जन्म सागर (बुन्देलखंड) मध्यप्रदेश में वि.सं. १९४८ कार्तिक सुद १० को ब्रह्माण कुल में हुआ था| आपके पिता का नाम नाथुरामजी व माता का नाम लक्ष्मीबाई था| जन्म नाम नारायण चौबे था| १७ वर्ष की युवा वे में सं. १९६५ आषाढ़ सुदी १० को भागवती प्रवज्या ग्रहणकर आप श्रीमद् धनचंद्रसूरीजी के शिष्य बने| वि.सं. १९९२ को आपको आचार्यपद से विभूषित किया गया|

वि.सं. १९९० के अहेमदाबाद में आयोजित साधु सम्मेलन में आपने भाग लेकर अनादिकाल के त्रिस्तुतिक का प्रमाण प्रस्तुत कर श्री संघ का गौरव बढ़ाया| मौधरा गांव के श्री आशापुरी माताजी मंदिर में वि.सं. १९९१ में पशु बलि बंद करवाकर केशर व धुप पूजा चालु करवाई|

झाबुआ (म.प्र.) के महाराजा को उपदेश देकर विजयदशमी के दिन होने वाली पशुबलि बंद करवाई| सांथू गाँव के शीतललादि रोग के प्रकोप को अष्टोत्तरी पूजा द्वारा शांत करवाया| वि.सं. १९९२ कार्तिक सुद १३-१४-१५ को भीनमाल शहर को पूरा खाली करवाकर मंत्रादी जाप द्वारा पुन: प्रवेश करवाया, जो आगे नगर की रिद्धि-सिद्धि का कारण बना हुआ है| यह घटना इतिहास में सुवर्णाक्षरों से दर्ज की गयी| भीनमाल नगर में उज्जैन करवाकर रिद्धि-सिद्धि प्राप्त करवायी| शासन के कार्य करते हुए ५० वर्ष के संयम पर्याय में वि.सं. २०१४, चैत्र सूद ५ को महाप्रयाण किया| बामणवाडजी (जिला-सिरोही) में आपका समाधि स्थल निर्मित किया गया है|

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