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श्री वज्रस्वामीजी म.सा.

 

श्री वज्रस्वामीजी म.सा.

 

आपका जन्म मालवा देश को तुंबवन गाँव में हुआ था| पिता का नाम धनगिरी व माता का नाम सुनन्दा था| धनगिरी ने दीक्षा लेने के बाद सुनन्दा ने पुत्र को जन्म दिया| पुत्र को जातिस्मरण ज्ञान हुआ| आपके द्वारा बहुत रुदन करने पर आपकी माता ने आपको साधू भगवंतो को बहोरा दिया| साधुओं ने साध्वीजी को सौपा वहां पर श्राविकाओं ने आपका लालन-पालन किया| आपने पालने में ही सोते हुए साध्वीजी द्वारा अध्ययन करते हुए ११ अंग पढ़ लिए| फिर आपको आठ वर्ष की उम्र में दीक्षा दी| देवों ने माया करके आपको देव पिण्ड वोहराने की कोशिश की लेकिन आपने वह पिण्ड नहीं लिया| जिससे हर्षित होकर उन देवों ने वैक्रिय लब्धि व आकाशगामिनी विधा दी| आपने भद्रगुप्तसूरीजी के पास १० वर्ष का अध्ययन किया| इस अवसर्पिणी के अंतिम दश्पुर्वधर बने|

दुष्काल के समय सकल संघ को कपड़े के पट्ट पर बिठाकर आकाशगामिनी विधा से जगन्नाथ पूरी ले गए वहां सकल संघ सुखी हुआ| वहां बौद्ध राजा को प्रभु की पुष्प पूजा द्वारा प्रभावित किया| जावडशाह के पास शत्रुंजय का उद्धार करवाया| पुराने कपर्दी यक्ष को हटाकर नए कपर्दी यक्ष को स्थापित किया| बारह वर्ष का दुष्काल पड़ने पर आपने एक पाहड़ पर जाकर अपने शिष्यों सहित अनशन करके स्वर्ग सिधारे| तब इन्द्र महाराजा ने रथ से उस पर्वत की प्रदक्षिणा दी जिससे उस गिरी का नाम रथावर्तगिरी पड़ा| आपके स्वर्ग गमन के बाद चौथा संघयन, चौथा संस्थान व १० वाँ पूर्व विचेद्ध हुआ| आपके नाम से वज्रशाखा शुरू हुई जो आज तक चल रही है| आप ८० वर्ष का संयम पालनकर ८८ वर्ष की उम्र में देवलोक हुए|

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