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कर्नाटक में राजस्थान की परछाई बने, गोडवाड के सपूत

श्रीमान मिश्रीमल वगतावरमलजी राणावत (दुजाणा)

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

भगवान को किसने देखा है, ये तो एक श्रद्धा और विश्वास है| कुछ ऐसी ही श्रद्धा और विश्वास कर्नाटक स्थित टिपटूर (अभी बैंगलोर) से २ की.मी. दूर हलेपालिया नामक गाँव में देवांग जाति के लोगों में व्याप्त है| जो गोडवाड की गौरवशाली धरा दुजाणा के धर्मवीर मिश्रिमल वगतावरमलजी राणावत को भगवान से कम नहीं मानते | देवांग समुदाय के हजारों लोगों के सुख-दुःख में भागीदार बन मिश्रीमल राणावत ने इस जाती के लोगों के उत्थान के लिए वो सब कुछ किया जो एक मसीहा ही कर पाता है| घी में घी सब डालते है परन्तु जो व्यक्ति तेल में घी डाले यक़ीनन वो कोई साधारण नहीं असाधारण व्यक्ति होता है| हेलपालिया गाँव में पावरलूम चलाकर सूती वस्त्रों का उत्पादन करने वाले हंजारों देवंगा जातीय बुनकरों का माल उचित मूल्य में खरीद कर पुरे भारत में बेचकर मिश्रिमल राणावत उन गरीब मेहनतकाश बुनकरों को उनके परिश्रम से बहाए पसीने की प्रत्येक बूँद का मेहनताना बराबर देते थे, उन्होंने कभी भी अपने मुनाफे के लिए उन गरीबों बुनकरों की लागत में नुकसान नहीं होने दिया, बल्कि बाजार भाव से उचित मूल्य देते थे| इतना ही नहीं इन बुनकरों के रहन-सहन , शिक्षा, चिकित्सा यहाँ तक की उनके पारिवारिक समारोह की हर व्यवस्था स्वयं देखकर हर तरह से उनसे जुड़े रहे, यही कारण है की आज भी देवंगा समुदाय के बीच मिश्रिमल राणावत श्रद्धा के केंद्र बने हुए है| श्री राणावत का मानना है की जिन व्यक्तियों के परिश्रम से हम आर्थोपार्जन करते है| उनका शोषण हमारा स्वयं का शोषण होता है| यदि उत्पादक को उसकी सही लागत मिले तो वो खरीददार के लिए हमेशा वफादार बना रहता है| हमने अपना कर्म का धर्म का मार्ग अपनाया और लक्ष्मी का संचय करने की बजाय उन्हीं गरीब बुनकरों का ऊँचा उठाया जिनके सहारे हम ऊँचे उठे| कितने महँ विचार है, मिश्रिमल राणावत के अहंकार से परे , सहज , सरल , सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के धनि, जिनमें दया , करुणा, ममता व स्नेह की अविरल धारा का प्रवाह झलकता है, चेहरे पर चिर-परिचित मुस्कान, सैदेव दूसरों की मदद करने की ललक मेहमान नवाजी, मान-मुनहार संस्थाओं से तन-मन-धन से गहन जुड़ाव, परिवार गाँव व समाज के प्रति समर्पण एक गुण हो तो गिनाऊं , श्री राणावत सैकड़ों गुणों की खान है, सचमुच आपका जीवन बेहद महान है|

 

 

 

 

 

 

 

श्रीमान मिश्रीमलजी राणावत – श्रीमती धाकुबाई राणावत

उम्र ७४ वर्ष पर जवानी की दम-ख़म ,जोश ,उत्साह व उमंग से भरपूर श्री राणावत आज भी जवान लगते है, मन से मजबूत , दृढ़ संकल्पी मेहनतकश ये व्यक्तित्व इतने फुर्तीले स्वस्थ व तन्दुरस्थ है की कभी भी उम्र उन पर हावी नहीं होती है| कहते है पूत के पाँव पालने में ही दिखाई देने लगते है| पिता स्वर्गीय वगतावरमलजी राणावत व माता मीराबाई के आंगन में खिले फूल मिश्रिमल बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे माता-पिता के संस्कारों से पल्लवित होकर बाल्यकाल से ही अपने विन्रम स्वभाव से सबका मन मोह लेने की कला अआपने सिख ली | आपने उस ज़माने में जब शिक्षा का बोलबाला कम था, बावजूद वे द्वितीय वर्ष पि.यू.सी. (बारहवी) तक शिक्षा अर्जित की और जीवन की दूसरी पारी वर्ष १९६३ के मात्र १९ वर्ष की अल्प आयु में कर्नाटक के टिपटूर गाँव में प्रारंभ की कड़ी मेहनत, पक्का इरादा , अनुशासन व ईमानदारी के बूते वस्त्र व्यवसाय में उपलब्धियों पर उपलब्धियां अर्जित करते हुए एक के बाद एक बैंगलोर में रेशम व रेशमी साड़ियों का भव्य कारोबार वर्ष १९९३ में  “शा. मिश्रिमल राणावत एंड कंपनी” तथा वर्ष १९९५ में “के.एम. राणावत” प्रतिष्ठान के माध्यम से प्रारंभ किया, व्यवसायिक ईमानदारी ने अपना रंग दिखाया और पूरा व्यवसाय जगत दंग रह गया| व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा की जंग में मिश्रिमल राणावत ने गजब की शोहरत हासिल कर दी| आज आपका प्रतिष्ठान क्षेष्ठा के चरमोत्कर्ष शिखर पर आसीन है| इसके पीछे है मिश्रिमल का त्याग, तपस्या , लगन , मेहनत , दूरदर्शिता व ईमानदारी , सैदव सच्चाई का दामन थाम कर धर्म की वल्गाओं के साथ कर्म की कसौटी पर खरे सोने की तरह चमक कर चमकदार बनने का गौरव प्राप्त किया है| यक़ीनन आज आपकी चमक हर क्षेत्र में दमक रही है| क्षेत्र चाहे व्यवसाय का हो चाहे समाजसेवा , धार्मिक , शिक्षा , चिकित्सा, साहित्य अथवा सांस्कृतिक , मिश्रिमल राणावत की उपस्थिति उपलब्धि बन जाती है| आपके हाथों में यश की लकीरे है| जो कार्य करने की अनूठी श्रमता कूट-कूट कर भरी हुई है| कौन सा कार्य कब, कैसे किससे करवाया जाए आपका दिमाग कंप्यूटर की तरह दौड़ता है, दानदाताओं से सेवा व धर्म के प्रकल्पों हेतु लाखों रुपये की धनराशी कैसे इक्कठी की जाये इन तमाम जवाबदारियों का दायित्वों का निर्वाहन आप भली-भाति कर लेते है|

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

स्व. पिताश्री वगतावरमलजी राणावत – स्व. मातुश्री मीराबाई राणावत

(कृषि फार्महाऊस – दुजाणा)

इन्हीं सारी विशेषताओं के कारण आप निर्माणधीन “श्री गोडवाड़ जैन भवन ट्रस्ट” पंजीकृत संस्थान जा बैंगलोर में गोडवाड़ीयों की आन-बाण और शान है के आप उपाध्यक्ष बनाये गए|इस पद पर आसीन होते ही आपने पद की गरिमा को बरकरार रखते हुए कर्मठता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर इस भवन को भव्य बनाने में जुट गये| बैंगलोर में गोडवाड़यों की पहचान को स्थायित्व देने हेतु गठित सक्रीय संस्था “श्री गोडवाड़ महासभा” के भी आप उपाध्यक्ष पर पर आरूढ़ है|इसके अलावा श्री अरनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ टिपटूर के ट्रस्टी, श्री महावीर जैन नेत्रालय के ट्रस्टी , श्री आत्मवल्लभ जैन उत्कर्ष ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री राजेंद्र सुरिश्वर्जी जैन गुरु मंदिर  के संस्थापक ट्रस्टी के रूप में निरंतर अपनी सेवाएँ  देकर सेवा के पुंज बने हुए है| अपने समय      का सदुपयोग कर आप सैदेव लोगों का नेत्रदान हेतु प्रेरित करते है| शेक्षणीक संस्थाओं में घूम-घूमकर निर्धन छात्रों की शिक्षा के समुचित प्रबंध इस तरह करते है की बाए हाथ से किये गये कर्म का दाये हाथ को भी पता नहीं चलता , वे किचित मात्र भी दिखावा कर निर्धन  छात्रों को यह महसूस नहीं होने देते की कोई उनर एहसान  कर रहा  है| विध्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तके ,गणवेश वे निरंतर  स्कूलों में वितरण करते रहते है, अस्पतालों में  जाकर रोगियों की सेवा करने  में उन्हें परम आनंद आता है| आप सैदेव लोगों से जुड़े रहना पसंद करते है| एकांतवास उन्हें रास नहीं आता| छोटे हो या बड़े, अमीर हो या गरीब , आप सबकों एक नजर से देखते है| मेहमानों को देखकर तो जैसे वे जमीन से उछल      पड़ते है| मेहमान नवाजी का शौक शायद ही उनके जैसा आज के इस वर्तमान परिवेश मे इक्का दुक्का देखने को मिले , राणावत मेहमान को भगवान मानकर उनकी सेवा करना अपना कर्तव्य मानते है|

राजदरबार में मिश्रीमलजी – धाकुबाई राणावत

उनका कहना है इंसान स्वयं अपने आप को तोले की वो क्या है, समाज धर्म, गाँव , राज्य व राष्ट्र के प्रति उसके क्या दायित्व है| मनुष्य जन्म सार्थक हो पा रहा है अथवा नहीं चिंतन करना चाहिए न की अपने जज्बातों को तोले जो व्यक्ति स्वयं को पहचान ले दर असल वो समझदार कहलाता है, वो दूरदर्शी जाना जाता है| जिसके हर बात समझने की समझ होती है| जो स्वयं को नहीं समझ सकता वो दूसरों को कैसे समझ पायेगा| नए विचार, नै स्थापानाएं , नै जिज्ञासा और नया उत्साह लेकर एकदम युवा तन और मन के धनी मिश्रिमल धार्मिक विचारों से सम्वानित व्यक्ति है| समय-समय पर समाज के विविध क्षेत्रों में अपना सहयोग देते रहते है| अपने अपने पैतृक गाँव दूजाणा में विमलनाथ भगवान मंदिर की ध्वजा नथाजी गुलाबजी परिवार ने संयुक्त रूप से ५ भाइयों ने मिलकर ली थी, क्रमानुसार हर पांचवें वर्ष मिश्रिमल राणावत परिवार द्वारा ध्वजा चढ़ाई जाती है| इसके अलावा एक किंवदंती के रूप में टिपटूर जैन मंदिर में प्रतिष्ठान जैनों के १८ वें तीर्थंकर अरनाथ भगवान की प्रतिमा जो संपूर्ण हिंदुस्तान में मात्र टिपटूर में ही है| मंदिर के जिणोरद्वार व खनन मुहर्त को लेकर भव्य मंदिर निर्माण कार्य में अग्रणीय रहे तथा जेठ सूद ६ की वंश परंपरागत ध्वजा का लाभ राणावत परिवार ने लिया|

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

श्री अरनाथ जिनमंदिर – टीपटूर में ध्वजारोहण करते हुए राणावत परिवार |

टिपटूर की ऐतिहासिक अंजनशलाका प्रतिष्ठा में भगवान के माता-पिता बनने का लाभ अर्जित कर अपने उच्च भावों से भव सुधार दिया, कहते है की जिसके भाव अच्छे होते है, उसका भव सुधर जाता है, श्री राणावत ने कुछ ऐसा ही करिश्मा कर मनुष्य जन्म को सार्थक कर दिया| इतना ही नहीं उन्होंने इस प्रतिष्ठा में वर्शिदान कर वर्षों की आस पूरी कर दी| साथ ही साथ स्वामी भक्ति का लाभ स्वामी वात्सल्य द्वारा प्राप्त किया| इस प्रतिष्ठा में और भी कई बहुमूल्य चढ़ावों के अंतगर्त , शांति स्नात्र महापूजा , भौमान में साफा, चुन्दडी, हार, तिलक लाभ , शत्रुंजय पट्ट व गुरु मंदिर की देवली बनाने का लाभ अर्जित कर धर्मवीर बनने का सौभाग्य प्राप्त किया, टिपटूर की प्रतिष्ठा में धर्म की सुगंध फ़ैल गयी थी, जिसकी भीनी-भीनी खुशबू आज भी टिपटूर की धरा को अच्छादित किये हुए है| इतना ही नहीं आपने बैंगलोर से चातुर्मास हेतु पधारे आचार्य चन्द्रानन सागर सुरिश्वर्जी की प्रेरणा से बैंगलोर के पुलिस विभाग को क्षेत्रीय गशत हेतु एक जीप प्रदत्त कर राष्ट्रीय सुरक्षा प्रहरियों को अमूल्य सहयोग दिया व यह संदेश दिया की जनता पुलिस विभाग को सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध मुहैय्या करे तो पुलिस दल बेहद मुस्तैदी से अपना कार्य कर सकती है|

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

श्री विमलनाथ जिनमंदिर – दुजाणा में ध्वजारोहण करते हुए मिश्रीमलजी राणावत और उनके सुपुत्र  |

मिश्रीमल राणावत ने राजस्थान में भीषणतम अकाल की चपेट में आये पशुधन हेतु समय-समय पर अपने गाँव दुजाणा में चारा उपलब्ध करवाया तथा मिश्री बाग़ के बाहर अवाला बनाकर मूक पशुओं हेतु पानी की व्यापक व्यवस्था की तथा आज भी जारी है| इस जगह में सर्व-धर्म समभाव के प्रतिक बने भेरू मंदिर का नवनिर्माण करवाकर सर्वत्र सराहना प्राप्त की| फलस्वरुप गाँव दुजाणा की ३६ कौम के ठाकुर गिरधारी सिंह के नेतृत्व में एकत्रित होकर भेरूजी मंदिर प्रांगन में मिश्रीमलजी राणावत का भव्य बहुमान कर, शाल, साफा व मालाओं से लाद दिया| गाँव के ठाकुर गिरधारी सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा की मिश्रीमल राणावत ने भगवान महावीर के कथन को अपने कर्म की वल्गाओं से सार्थक कर दिखाया की मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है| मिश्रीमल राणावत हमेशा माध्यमवर्ग की पीड़ा को महसूस करते है और यथासंभव सहयोग कर मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करने का प्रयास करते है| मिश्रीमल को पूरा गाँव मिश्री की डली के रूप में जानता है, जितनी मिठास मिश्रीमल की वाणी में है| आप बोलते है तो फूल झरते है, मुस्कुराते है तो ग़मगीन व्यक्ति भी उनकी मुस्कुराहट में सहभागी बन जाता है|

श्री राजेंद्रसूरी गुरुमंदिर – टीपटूर

आपके तीन होनहार पुत्र व तीन पुत्रियां है| आपके बड़े पुत्र नरपत राणावत बैंगलोर के राजनीती में बड़ा वर्चस्व रखते है | आल इण्डिया कर्णाटक के जनता दल के सचीव है|अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीती के गुणों व ऊँची पहचान के अलावा अपनी सेवा भावना की बदौलत वे वहां के पार्षद बनने का गौरव प्राप्त कर कर्नाटक ने राजस्थान की परछाई बने ये पुरे राजस्थान का सौभाग्य है की कर्णाटक की राजनीती में युवा नरपत राणावत गोडवाड़ के पहले शक्स है जो ध्रुव तारे की तरह चमके है|

मिश्रिमलजी राणावत के पुत्र :

नरपतकुमार राणावत    महेंद्रकुमार राणावत    मुकेशकुमार राणावत

आपके मंझले पुत्र महेंद्र राणावत और सबसे छोटे पुत्र मुकेश राणावत व्यवसायिक वटवृक्ष को सिंचित कर पिताजी के सपनों को नित नया आकार दे रहे है| मिश्रीमल राणावत की धर्मपत्नी श्रीमती धाकुबाई धर्मपरायणा, कर्तव्यनिष्ठ महिला है| एक पतिव्रता पत्नी, ममतामयी माँ व आदर्श सासू के रूप में अपने हर फर्ज का सम्मानपूर्वक निर्वाहन कर मिश्रीबाग़ की बगीया में सैदेव खुशियाँ की बाहर बनकर महक व चहक रही है| श्रीमती धाकुबाई ने तीन बहुएं लाई| लेकिन उन्हें बेटियाँ का प्यार देकर आज के युग में मातृत्व प्रेम का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है| धाकुबाई मिश्रीमलजी की हमदम बन सदेव उनके सहकार्यों में सहभागिनी बनती है| सरल स्वभाव आपका सात्विक गुण है और इसी गुणों की गुणवत्ता से राणावत परिवार को उन्होंने संस्कारमय बनाकर अपने समय में सेवा , त्याग व धार्मिक प्रवृतियों के कारण समाज में प्रतिष्ठापित हुए नाथाजी गुलाबजी राणावत परिवार के वटवृक्ष को सिंचित कर रही है|

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

टीपटूर में हाथी पर वर्षीदान करते हुए मिश्रीमलजी राणावत |

मिश्रीमल राणावत हिंदी,अंग्रेजी, कन्नड़, मारवाड़ी सहित कई भाषाओं के जानकार है व धडल्ले से बोलते है| आपके संबंध कई बड़े-बड़े राजनेताओं अभिनेताओं व सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अतिविशिष्ट व्यक्तियों से जिनका लाभ वे समाजसेवा के क्षेत्र में उठाते है| कन्नड़ फिल्मों के सुपर स्टार राजकुमार से आपके पारिवारिक संबंध बताये जाते है| इसके अलावा कर्नाटक के पूर्व कबिनेट मंत्री टी.एम. मंजुनाथ से भी आपके व्यापक संबंध है जिन्होनें “मिश्रीमल राणावत एंड कंपनी” का बैंगलोर में उद्घाटन किया था| सब कुछ होते हुए भी श्री राणावत के पुरे परिवार पश्चात संस्कृति के इस दौर में भारतीय संस्कृति का अनुपम उदहारण है| पत्र- पत्रिकाओं के शौक़ीन मिश्रीमल राणावत क्षेत्रीय समाचार पत्रों को ख़ासा योगदान देते है| आप राष्ट्र के नवनिर्माण में कलमकारों का महत्वपूर्ण योगदान मानते है| इसलिए आप उनका बेहद सम्मान करते है व हर तरफ़ा सहयोग भी देते है| आपके द्वार पर दस्तक देने वाले व्यक्ति के समक्ष राणावत परिवार सदेव पलक पावड़े बिछाये मस्तक झुकाकर उनका स्वागत करने के लिए आतुर रहता है| प्रेम से इस गौरव शाली राणावत परिवार के शिखर पुरुष मिश्रिमल राणावत शतायु बने यही प्रभु से कामना की…..

 – शताब्दी गौरव


Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

श्रीमती धकुबाई मिश्रीमलजी राणावत अतिथि भवन – बैंगलोर

श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमलजी राणावत अतिथि भवन

का भव्यता के साथ हुआ उद्घाटन

1

बेंगलोर : गोडवाड भवन जैन ट्रस्ट बेंगलोर के तत्वाधान में लालबाग रोड क्रॉस में गोडवाड़ भवन के सामने नवनिर्मित श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमलजी राणावत अतिथि भवन का उद्घाटन गत १५ मार्च को शुभ मुहूर्त में नामकरण व उद्घाटन के लाभार्थी श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमॉल, नरपतजी,महेंद्रजी, मुकेशजी राणावत परिवार द्वारा बेंगलोर के जाने माने पंडितो के मंत्रोचरण के साथ हुआ| उद्घाटन से पूर्व राणावत परिवार बड़ी संख्या में बेंगलोर के गणमान्य लोगों के साथ शोभायात्रा के रूप में गोडवाड़ भवन जहां भव्यता के साथ समारोह आयोजित किया गया| समारोह में राणावत अतिथि भवन के मुख्यदानदाता समाजरत्न व भामाशाह से अलंकृत दुजाणा निवासी मिश्रिमल राणावत, ट्रस्ट के अध्यक्ष भीमराज करबावाला, विशेष अतिथि क्षेत्रीय विधायक आर वी. देवराज, सम्मानित अतिथि राणजीतमॉल कानुंगा व राणावत परिजन मंचासीन थे|

3

उद्घाटनकर्ता राणावत परिजन व अतिथियों के दीप प्रज्वलन के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष भीमराज करबावाला ने अतिथियों का स्वागत किया| महामंत्री कुमारपाल ने गोडवाड़ भवन व अतिथि भवन के निर्माण यात्रा पर प्रकाश डाला| समारोह में चिकपेट क्षेत्र के विधायक आर वी. देवराज ने राजस्थानी समाज के दानदाताओं की सहारना करते हुए कहा की राजस्थानी समुदाय सदैव दान-धर्म में अग्रणी है| इस अवसर पर समारोह में ट्रस्ट के अध्यक्ष व महामंत्री के साथ द्वि उपाध्यक्ष हीरालाल बलदोता फूलचंद करबावाला, द्वि सहमंत्री रमेश चांदावत, रंगराज हिंगड़, कोषाध्यक्ष कांतिलाल मेहता, सहकोषाध्यक्ष बाबूलाल राठोड आदि ने उदारमना मुख्यदानदाता व उद्घाटनकर्ता मिश्रीमल धाकुबाई राणावतपरिवार के सदस्यों का माला-शाल, तिलक कर रजत स्मृति चिन्ह के साथ सम्मान किया गया|इस अवसर ट्रस्ट की ओर से अभिनंदन पत्र भी किया गया|

4

सम्मान समारोह के बाद राणावत परिवार बैंड बाजों की मधुर ध्वनि के साथ नवनिर्मित राणावत अतिथि भवन पहुंचे जहाँ फीता खोलकर भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया| उद्घाटन के बाद मिश्रीमॉल राणावत ने संघ अध्यक्ष भीमराज करबावाला व ट्रस्ट सदस्यों की उपस्थिति में नामकरण के लाभार्थी श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमलजी राणावत के नाम से मुद्रित नए भवन की स्टेशनरी की पूजा कर विधिवत प्रथम बुकिंग राणावत ने स्व नाम से की|इस अवसर पर अतिथि भवन के अन्य सहयोगी भी उपस्थित थे|

2

भावविभोर राणावत अतिथि भवन के नामकरण के लाभार्थी एवं उपाध्यक्ष मिश्रीमलजी राणावत ने ट्रस्ट अध्यक्ष भीमराज करबावाला, उनके सेवा भावी दोनों पुत्रों ललित व विक्रम करबवाला तथा महामंत्री कुमारपाल सिसोदिया की ट्रस्टी को प्रदत्त उत्कुष्ट सेवाओं से अभिभूत होकर आभार व्यक्त किया| साथ ही राणावत अतिथि भवन के प्रोजेक्ट चेयरमेन प्रसिद्द उद्योपति दिलीपजी सुराणा के प्रति भी हार्दिक आभार व्यक्त किया जिनके सफल मार्गदर्शन में सुन्दर भवन तैयार हुआ| राणावत परिवार ने विक्रम करबावाला का नए भवन में माला शाल द्वारा सम्मान भी किया|

5

ज्ञातव्य है की गोडवाड़ भवन के ठीक सामने ५ हजार वर्ग फीट के भूखंड पर बने बहुमंजिला श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमॉल राणावत अतिथि भवन में भोजनशाला, मांगलिक हॉल, ४४ वातानुकूलित रूम, जीम आदि की व्यवस्था है| शादी ब्याव के लिए बाराजियों व घरवालों को ठहरने के लिए गोडवाड़ भवन के आसपास ही कमरों की सुन्दर व्यवस्था हो इस उधेश्य से इस सम्पूर्ण वातानुकूलित राणावत अतिथि भवन का निर्माण हुआ है|

Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)


**** सत्कार्य की सजाई माला ****

  • टीपटूर (कर्णाटक) में श्री अरनाथ जिनप्रसाद की वंशपरंपरागत (कायमी) ध्वजा का लाभ |

  • टीपटूर(कर्णाटक) में श्री अरनाथ मंदिरजी में शत्रुंजय महातीर्थ के पट्ट का लाभ|

  • टीपटूर(कर्णाटक) मंदिर निर्माण में अपूर्व सहयोग |

  • टीपटूर मंदिरजी अंजनशलाका प्रतिष्ठा में माता-पिता बनने का अमूल्य लाभ |

  • टीपटूर धर्मशाला में एक कमरें (रूम) का लाभ|

मिश्रीमलजी वगतावरमलजी राणावत कृषि फार्महाऊस – दुजाणा

कृषि फार्महाउस - Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

कृषि फार्महाऊस चबूतरा – दुजाणा

  • टीपटूर में राजेंद्रसूरीजी गुरूमंदिर में राजेंद्र सूरी गुरु महाराज की देवली का सम्पूर्ण लाभ |

  • राजेंद्रसूरी गुरूमंदिर प्रतिष्ठा में शांतिस्नात्र एवं हाथी पर बैठकर वर्षीदान का लाभ|

  • दुजाणा (राज.) में श्री विमलनाथ मंदिरजी कायमी की वंशपरंपरागत ध्वजा का राणावत परिवार का लाभ |

  • दूजाणा (राज.) में विमलनाथ मंदिर में सरस्वतीदेवी की मूर्ति भराना, बिराजमान एवं संपूर्ण देवकुलिका का लाभ|

  • दुजाणा (राज.) में विमलनाथ मंदिर में सुधर्मस्वामी की मूर्ति भरना-बिराजमान एवं संपूर्ण गोख निर्माण का लाभ |

  • दुजाणा (राज.) में विमलनाथ मंदिरजी में ज्वालामालिनी की देवी मूर्ति भारण एवं बिराजमान का लाभ|

 Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

जैसलमेर में समाज रत्न पदवी से विभूषित मिश्रीमलजी राणावत

  • दूजाणा (राज.) में श्री मुनिसुव्रतस्वामी मंदिरजी का मुख्य शिला एवं अन्य दो शिला के शिलान्यास का लाभ |

  • दुजाणा(राज.) में मिश्रिमल वगतावरमलजी राणावत कृषि फार्म पर स्वद्रव्य से काला भेरूजी का मंदिर एवं सम्पूर्ण व्यवस्था का लाभ |

  • दुजाणा (राज.) में कृषि फार्म में स्वद्रव्य से चबुतरा निर्माण एवं प्रतिदिन दाना का लाभ |

  • दुजाणा(राज.) में कृषि फार्म में स्वद्रव्य से पशुओं के पानी हेतु अवारा निर्माण एवं प्रतिदिन पानी का लाभ|

  • दुजाणा ग्रामदेवी (खेडादेवी) की प्रतिष्ठा में विशिष्ट योगदान |

  • दुजाणा प्रतिष्ठा में शिखर सिंह की मूर्ति स्थापना का लाभ |

राजस्थान के पूर्व राज्यमंत्री देवासी के साथ स्वनिवास स्थान पर

  • दुजाणा में मंदिरजी के रजतोत्सव मोहत्सव में जय जिनेन्द्र, शांति स्नात्र एवं स्वामीवात्सल्य का लाभ |

  • गडवारा (पाली-राज.) के आराधना भवन में रूम का लाभ|

  • टीपटूर प्रतिष्ठा मोहत्सव में सभी लाभार्थियों का तिलक-माला-श्रीफल-साफाचुन्दडी द्वारा सम्मान करने का लाभ|

  • शंखेश्वर से जैसलमेर छ:री पालित संघ में संघवी बनने का लाभ |

  • जैसलमेर में समाज रत्न पदवी से सम्मानित |

  • पालीतणा में पाँच हाजार आराधकों के चातुर्मास आयोजन में संघवी का लाभ एवं सिद्धचक्र पूजन का लाभ |

कर्नाटक पूर्व गवर्नर श्री हंसराज भारद्वाज के साथ मिश्रीमलजी राणावत |

  • मोहनखेड़ा में राजेंद्रसूरी गुरुमंदिर के सामने सम्पूर्ण फर्श बनाने का लाभ |

  • जयप्रभविजयजी श्रमण लिखित मुहूर्त राज पुस्तिका के प्रकाशन में विशिष्ट योगदान |

  • मोहनखेड़ा चातुर्मास में उवसग्गहरं महापूजन का लाभ |

  • बैंगलोर किलारी रोड सी.बी. भंडारी स्कूल में पू. पिताश्री के फोटो का लाभ|

  • जैन आई हॉस्पिटल शेषाद्रीपुरम में ट्रस्टी बनकर सेवा करने का लाभ|

  • बैंगलोर श्री लब्धिसूरीजी जैन धार्मिक पाठशाला में स्तंभ बनने एवं फोटो का लाभ |

भारत के पूर्व रक्षा मंत्री श्री जॉर्ज फ़र्नान्डिस के साथ मिश्रिमलजी राणावत |

  • देवेनहल्ली तीर्थ में टिपटूर संघ की देवकुलिका का भूमिपूजन खननविधि का लाभ |

  • गोडवाड़ भवन , बैंगलोर में ट्रस्टी बनने का लाभ एवं एक कमरे का लाभ|

  • बैंगलोर शांतिनाथ शांतिसूरीजी मंदिर, अवेन्यु रोड में ट्रस्टी का लाभ|

  • गोडवाड़ भवन, बैंगलोर के सामने विशाल भूमि पर सात मंजिल भवन का श्रीमती धाकुबाई मिश्रीमलजी राणावत अतिथि भवन के नामकरण का लाभ |

  • गोविंदपुर तीर्थ में मेले का लाभ एवं अनेक तीर्थों में शिलालेख में अनेक लाभ |

बंगलौर में मिश्रीमल राणावत एंड कं. के उद्घाटन में उपस्थित पूर्वमंत्री टी.एम. मंजुनाथ

 Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री हेच.डी. देवगौड़ा एवं तत्कालीन उपमुख्यमंत्री श्री सिद्धरामय्या के साथ अपने प्रतिष्ठान पर


धार्मिक क्षेत्रों में आपके द्वारा संस्थाओं में सेवा प्रदान

  • टीपटूर श्री अरनाथ जैन संघ के ट्रस्टी १९८८ से २००१

  • बैंगलोर गोडवाड़ जैन महासभा उपाध्यक्ष २००२ से कार्यरत

  • बैंगलोर गोडवाड़ भवन जैन ट्रस्ट (रजि.) के उपाध्यक्ष २००३ से कार्यरत

  • दुजाणा (राज.) जैन संघ के उपाध्यक्ष २००७ से २०१२

  • दुजाणा (राज.) जैन संघ के सलाहकार २०१२ से कार्यरत

  • बैंगलोर महावीर जैन नेत्रालय में ट्रस्टी २००१ से कार्यरत

  • बैंगलोर शांतिनाथ शान्तिसूरीजी जैन मंदिर के ट्रस्टी २०१२ से कार्यरत

  • टीपटूर में राजेंद्रसूरीजी गुरूमंदिर के फाउंडर ट्रस्टी १९९६ से कार्यरत

 

 Shri Misrimal Vagtavarmalji Ranawat (Dujana)

चेहरे पे मुस्कान सजी है……

कुछ करने की तमन्ना रग-रग में बसी है…….

समाज के उपवन को अपनी समर्पण सेवा से महकाया,

वात्सल्य के सागर है मिश्रिमल आप, हर दिल में आपका नाम समाया|

 

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